विगुल गीत
भीम का भारत भीम की आहट
ओ मनुवादी दहशत खाओ !
भीम की दुनिया भीम की बगिया
हत्यारों कुछ तो शरमाओ ॥
जब चलती थी तब चलती थी
अब न चली है अब न चलेगी ।
सोई आंधी जाग चुकी है
पंडित जी अब आग बुझाओ ॥
एकलव्यों के कटे अगूंठे
आज हुए हैं सभी इकठ्ठे ।
सबको यहीं जवाब चाहिए
यह बुलंद आवाज उठाओ ॥
सुनो द्रोण बेहूदे बाभन
ठकुर सोहाती नहीं चलेगी।रोहित के टूटे सपनो से
ओ दलितों अब बज्र बनाओ ॥
-शैलेन्द्र कुमार शुक्ल